Press Note: Release of MP Social Watch State Report 2013

भोपाल। सोशल वॉच, मध्यप्रदेश द्वारा मध्यप्रदेश विधानसभा के जुलाई 2011 सत्र के प्रश्नकाल पर आधारित मध्यप्रदेश सोशल वॉच रिपोर्ट 2013 का आज नगरीय प्रषासन मंत्री श्री बाबूलाल गौर के मुख्य आतिथ्य एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री लज्जाषंकर हरदेनिया की अध्यक्षता में विमोचन किया गया। इस मौके पर श्री गौर ने कहा कि प्रष्नकाल सरकार पर निगरानी का घंटा होता है। यह सरकार के लिए परीक्षा की घड़ी होती है। उन्होंने कहा कि कई जनप्रतिनिधियों में कर्त्तव्यनिष्ठा का बोध नहीं रहता, जबकि न केवल उन्हें जनता की आवाज विधानसभा में उठानी चाहिए, बल्कि उसे सुनना भी चाहिए। सोषल वॉच को पूरी विधानसभा की कार्यवाही का विष्लेषण करना चाहिए।
अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री हरदेनिया ने कहा कि प्रष्नकाल में प्रष्न पूछने एवं जवाब देने में जनप्रतिनिधि की योग्यता दिखती है। नए विधायकों को बेहतर प्रषिक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे कि वे विधायिका में ज्यादा बेहतर भागीदारी निभा सके। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता ष्याम बोहरे ने कहा कि इस तरह की रिपोर्ट जनता के बीच ले जाना चाहिए। माखनलाल पत्रकारिता विष्वविद्यालय के संचार विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष सुश्री दविन्दर कौर उप्पल ने कहा कि कुंजीलाल संसदीय विद्यापीठ के साथ या अलग से विधायकों के साथ प्रषिक्षण कार्यक्रम करना चाहिए। समर्थन के निदेषक एवं सोषल वॉच के वरिष्ठ साथी डॉ. योगेष कुमार ने कहा कि सोषल वॉच मुख्य रूप से शासन के अंगों का सामाजिक विकास से जोड़कर वॉच का काम करता है।

 

रिपोर्ट को प्रस्तुत करते हुए राजु कुमार ने बताया कि जुलाई 2011 सत्र के तारांकित एवं अतारांकित कुल 2100 प्रष्नों का विष्लेषण किया गया है। इसमें प्रश्न नहीं करने वाले सदस्यों की संख्या 48 है, जो कुल सदस्यों का लगभग 25 फीसदी (अध्यक्ष, मंत्रियों, मनोनित सदस्य एवं  नवनिर्वाचित सदस्य को छोड़कर) है। विधानसभा में अजा एवं अजजा सीट से निर्वाचित सदस्यों की संख्या लगभग 35 फीसदी है, पर प्रश्न नहीं करने वाले कुल सदस्यों में से आरक्षित सीटों से निर्वाचित सदस्य लगभग 48 फीसदी हैं। प्रश्न नहीं करने वाले सदस्यों में आरक्षित सीटों से निर्वाचित सदस्यों की संख्या अनुपातिक रूप से ज्यादा है। सबसे ज्यादा 37 प्रश्न भाजपा सदस्य विश्वास सारंग ने किया। स्कूल शिक्षा विभाग से सबसे ज्यादा 187 प्रश्न किए गए हैं, जो कि सबसे ज्यादा प्रश्न करने वाले 10 विभागों के कुल प्रश्नों का प्रश्नों का 16 फीसदी है। कुल प्रश्नों में से 49 फीसदी प्रश्न कांग्रेस ने किया है। कांग्रेस सदस्यों द्वारा 1029 प्रश्न किए गए हैं, जबकि सदन में उनकी संख्या महज 33 फीसदी (अध्यक्ष, मंत्रियों एवं मनोनित सदस्यों को छोड़कर) है। भाजपा सदस्यों ने कुल किए गए प्रश्नों में 833 प्रश्न (40फीसदी) किया है, जबकि सदन में उनकी संख्या सबसे ज्यादा है। संभागवार पूछे गए प्रश्नों में सबसे ज्यादा 335 प्रश्न (17 फीसदी) जबलपुर संभाग से पूछे गए हैं। जबलपुर संभाग में 36 विधानसभा क्षेत्र हैं, यानी इस संभाग से प्रति विधानसभा क्षेत्र 9.30 प्रश्न किया गया। पर प्रति विधानसभा क्षेत्र से किए गए औसत प्रश्नों को देखा जाए, तो सबसे ज्यादा प्रश्न चंबल संभाग से किया गया। चंबल संभाग में 13 सीट है एवं 198 प्रश्न पूछे गए, जो प्रति विधानसभा 15.23 प्रश्न होता है। शहडोल संभाग में 10 विधानसभा क्षेत्र है, पर यहां से महज 9 प्रश्न ही पूछे गए हैं। रीवा एवं नर्मदापुरम् संभाग से भी सीटों की तुलना में औसतन कम प्रश्न पूछे गए हैं।

 

भवदीय,
सोशल वॉच मध्यप्रदेश
संपर्क: विषाल नायक - 9826783036
  • Parliament
  • NSW monitors the health of Indian Parliament by examining and establishing some worrying trends in the way in which the Parliament functions and conducts its business. Read more
  • Judiciary
  • NSW study the specific cases to understand the mind of the Judiciary. Under this section NSW analyzes issues and proposals on judicial accountability and reforms. Read more
  • Executive
  • NSW analyses the structural challenges in the Executive such as the conflict of interest between the Parliament and the Executive and within the Executive and related issues. Read more